गुरुवार, २३ नोव्हेंबर, २०२३

स्वेच्छानी नालायक

 फेसबुक मध्ये माझे जे  योग दान....


माझी टिप्पणीः कुठलं स्टेडियमच्या नावाने कोण हैराण झाले आहेत?

मुघलांच्या (किंवा समझा इंग्रेजांच्या) नावांत काय न आवडणारी ध्वनी होती की लोकांना ‘सहन’ करावी लागली आहे?

सर्वकाही देवानिर्मित आहेत.  त्यात इतिहास सुद्धा जोडलेला आहे, नाही का?  इथे इतिहासाची सपशेल अवहेलना, म्हणजे की देवाची सपशेल अवहेलना होत आहे की नाही?

आमच्यात काय ते झालं आहे की इतिहासाची देणगी नाकारत बसलो आहोत?

आम्ही कस काय –स्वेच्छानी- नालायक बनलो आहोत की बॉम्बे, कलकत्ता, मद्रास, मुघल सराय, पूना, ...औरंगाबाद अणि इतर यांना मुकवावे लागले आहेत?  लोकांच्या सहज तोंडी बसलेले नांवे मुकवावे लागले आहेत? हे एक अत्यंत नकोसी वाटणारी दुर्दैवी बाब आहेत अस माझं मंतव्य आहे.

धन्यवाद. 

14.00 hrs 23-11-23



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दिल्लीमें अकबर रोड, शहाजहाँ रोड, तुघलक रोड, औरंगजेब रोड, गोवा वोस्को शहर, औरंगाबाद, औरंगाबाद में औरंगजेब कि कबर, अजमेर, अलिगढ़, इलाहाबाद.. रेल्वे स्टेशनपर W.H.Wheeler book stall... the list is very big...

22 hrs, (12.39 p.m., 26-11-2023)


मेरी टिप्पणीः  धन्यवाद for responding. आपने तो मुझे और भी दुःखी कर दिया.  आपका research जबरदस्त है.

वे लोग इतने साल राज न कर पाते अगर स्थानिय लोगों से सहयोग न होता. औरंगझेब का तो record है, शायद 50 सोलों के करीब राज किया था. देश का नाम आखीर में हिंदुस्तां रखा था उन्हों ने. लोग खुशी खुशी फारसी सिखते थे जैसे अब है कि अंग्रेजी भाषा के तरफ रुख दे रहे है, जिस के बारे में किसी को कुछ खटकना नहीं. यह सब का कारण सिर्फ इताना है कि उन्हों से पाया हुआ हिंदुस्तान या कि इंडिया का हमें मालिक बनना है लिकीन उसके लिए  गैर-मुल्की लोगों या उन्के नामों को श्रेय नहीं देना है.   विष्टन चर्चील ने जो बुरा-भला कहा है अपने वारे वह पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता.

The list is very long as you say, we need to sieve all of our languages, Marathi, Panjabi, and all  freed of foreign words ingressed sheer out of  our dedication to Persian and English.  The list would indeed be much longer. 

धन्यवाद.

26-11-2023

मेरी टिप्पणी-2  धन्यवाद. जितना कि भारत में दुसरों का लिहाज़ करने का मौका मिलता है शायद ही कहीं ओर मिलता होता. लेकीन जैसे कि गाड़ी चल पड़ी है, जय श्री राम, भारत माता की जय बोल लिहाज़ करना एक दूर की बात बन गई है. असल में ठीक 70 सालों के बाद पाकिस्तान को सही मायने में मान्यता मिली है. अकबर, औरंगाजेब को नागवारा करके जाने उनके हाथ में थमा दिया है समझो. यह सब आप की अमानत है, आप को मुबारक... सॉरी.. अभिनंदन, बढ़ाई हो.

 मुबारक या और सारे शब्दों को चुन चुन कर निकाल दिया जाय, तो फिर असली भारतीय चैन की निंद सो पाएंगे.

अहम बात तो यह बन जाती है कि सारी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को भी पाकिस्तान की अमानत मान कर सरहद पार कर देनी पड़ेगी.

27-11-2023


मेरी टिप्पणी-3 कहीए तो अलिगढ़ सही लगता है या कि हरिगढ़? आदत से लाचार को ठोक्कर ज़रूर लगनी है. चाहे आप कोन भी हो, यहां के कि वहां के.

एक बार एक वहां के बंदे के साथ टैंन में मुझे सफर करने का मौका मिला था। मुझे उनकी हिंदी सुनकर उठखड़ा होना पड़ा. एक सुद्ध हिंदी जो वे बोलते थे और आम हिंदी जो हम सुनते आये हैं उसमे बहुत ही फ़र्क दिखा. The list is very big जैसे की आपने कहा, असल में वह है the list is very very big.

अलिगढ़ के साथ साथ हिंदी फिल्म जगत को भी खोने के लिए तयारी बतानी जरूरी है. जो किसी की भी यह अमानत हो ले जाय!

पाकिस्तान किस कारण से बना था? अभी 70 सालों के बात उसके जान मे जान डालने का मौका मिल रहा है. लाहोर में फिर से रौनक भर आयेगी. अमिताभ बच्चन को अपने और भी जायदाद हाथ से गवांकर लोहोर के लिए परमिट लेनी पड़ेगी.

कारण सिर्फ यह कि अभी हम सुद्धी करण करने पर उतर आयें हैं. पाक हम बनना चाहते हैं और हिंदुस्तां पाकिस्तान बनेगा. 

A reverse flick. 

7:19 a.m. 27-11-2023   To FB at 8:02 am


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